
जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) को सुप्रीम कोर्ट से वह राहत नहीं मिली, जिसकी उन्हें उम्मीद थी।
बिहार विधानसभा चुनाव को रद्द कराने की मांग वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से ही इनकार कर दिया।
इतना ही नहीं, कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए काफी सख्त टिप्पणी भी की, जिसने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी।
चुनाव लड़े, सीट नहीं मिली
हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव में राजनीतिक रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने अपनी नई पार्टी जन सुराज पार्टी के जरिए
राज्य की सभी सीटों पर चुनाव लड़ा।
लेकिन नतीजा? एक भी सीट नहीं। यहीं से सियासी कहानी ने कोर्ट का रास्ता पकड़ लिया।
हार के बाद कोर्ट क्यों?
चुनाव में करारी शिकस्त के बाद प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि बिहार में चुनाव गैर-कानूनी तरीकों से कराए गए।
उनकी मांग थी, 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव रद्द किए जाएं। राज्य में दोबारा चुनाव कराए जाएं। इसी मांग को लेकर PK सीधे सुप्रीम कोर्ट पहुंच गए।
CJI की तीखी टिप्पणी
6 फरवरी को हुई सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने सवाल दाग दिया, “आपकी पार्टी को कितने वोट मिले?” “जनता ने आपको नकार दिया है।” “क्या आप लोकप्रियता पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल कर रहे हैं?”
चुनाव में वोट नहीं मिले, कोर्ट में वैलिडेशन खोजा जा रहा है।
किस आधार पर लगाया चुनावी धांधली का आरोप?
जन सुराज पार्टी की याचिका में दावा किया गया कि आदर्श आचार संहिता लागू रहते हुए बिहार सरकार ने महिला वोटरों को ₹10,000 DBT के जरिए ट्रांसफर किए। यह कदम चुनाव को प्रभावित करने वाला और गैरकानूनी था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील पर सुनवाई करने से इंकार कर दिया।
SC ने क्यों नहीं सुनी याचिका?
सुप्रीम कोर्ट ने साफ पूछा, “आप सीधे यहां क्यों आए? हाई कोर्ट क्यों नहीं गए?” कोर्ट ने जन सुराज पार्टी को सलाह दी कि पहले हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाएं। इसके साथ ही याचिका को खारिज कर दिया गया। मतलब साफ है हर चुनावी हार सुप्रीम कोर्ट का मुद्दा नहीं बन सकती।
Politics meets Reality
प्रशांत किशोर लंबे समय तक चुनाव जिताने वाले strategist रहे हैं। लेकिन इस बार राजनीति ने उन्हें वही सिखाया जो जनता सिखाती है “मैदान में उतरने पर रणनीति नहीं, जनादेश चलता है।”
